गोपाल स्वरूप वाजपेयी
कहते हैं कि इंसान का बुरा समय आने से पहले ईश्वर उसकी मति हर लेता है। अर्थात इंसान पर कुमति सवार हो जाती है। उसके सोचने व काम करने का ढंग पहले की तुलना में एकदम विपरीत होता है। बीजेपी के साथ ही ऐसा ही हो रहा है। बीजेपी थिंकटैंक, बड़े बड़े नेताओं पर लगता है कुमति सवार है। बीजेपी नेताओं में जनवरी से विवेक का नाश होना शुरू हो गया था । कैसे ? हम बताते हैं। जब देश को संभालने की जरूरत थी , तब कोरोना विजय उत्सव मनाने लगे, वैक्सीन उत्सव में झूमने लगे। जबकि इसी दौरान और इससे 4 माह पहले से विदेशों में कोरोना की दूसरी लहर प्रचंड रूप से बह रही थी। यह भी तय था कि ये लहर भारत में आएगी। कुछ जानकार लोग चेताते भी रहे। लेकिन जब दिमाग में कुमति सवार होती है, विनाश होना होता है तो विवेक उल्टा ही काम करता है। दूसरी लहर भारत में आ गयी वो भी अति प्रचंड रूप में। लोग अस्पताल के बाहर और अंदर मरने लगे। लाशों के अंबार लगने लगा। शमशान घाट कराहने लगे तो फुटपाथों पर दाह संस्कार होने लगे। ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचने लगा, मरीज तड़प तड़पकर मरने लगे। लगभग सभी राज्यों में यही हाल। इसके बाद भी बीजेपी की आंखों में बंगाल की सत्ता नाच रही थी। लाशों का अंबार लगता रहा , लेकिन पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह बंगाल में रैलियां करते रहे, अट्टहास करते रहे। देशभर से बीजेपी नेताओं का जमावड़ा बंगाल में हो गया। जनता तड़प तड़पकर सब देखती रही। और जब बंगाल चुनाव का नतीजा सामने आया तो बीजेपी में भूचाल आ गया। यहां लगा कि शायद बीजेपी पर अब कुमति का साया खत्म हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी इतने अहंकार में है कि उसे जनता के दर्द और उसकी भावनाओं से कोई लेना देना नहीं । बीजेपी समझने लगी कि चुनाव जीतना उसका जन्म सिद्ध अधिकार है। बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद वहां हिंसक वारदातें हुईं। इसमें बीजेपी समर्थकों के साथ अत्याचार की खबरें हैं। हिंसा किसी भी सभ्य समाज के लिए शुभ नहीं। बीजेपी ने इस हिंसा के खिलाफ पूरे देश में धरना कार्यक्रम घोषित कर दिया। लेकिन जनता सब देख रही है कि ये धरना क्यों और किसके खिलाफ किया जा रहा है। हिंसा के दौरान बंगाल में चुनाव आयोग व राज्यपाल का शासन चल है। आपका प्रशासन, आपकी पुलिस, आपका पैरा मिलिट्री फ़ोर्स। तो फिर धरना का मक़सद क्या है। क्या बीजेपी नेताओं ने , उसके थिंकटैंक ने यह नहीं सोचा कि इलाज के अभाव में हजारों लोग रोजाना मर रहे हैं , इनके लिए भी कम से कम श्रद्धांजलि का कार्यक्रम रख दें। ये न कर एकें तो मरीजों व जरूरतमंदों की सेवा के लिए कोई अभियान चला दें। लेकिन नहीं , इस पार्टी को हमेशा आपदा में अवसर चाहिए। जिन मुद्दों पर ये घिरते हैं उसकी काट के लिए नया शि गू फ़ा चाहिए, जिससे इनकी नाकामी छिप जाएं। इन्हीं हरकतों की वजह से अब बीजेपी का ग्राफ गिर रहा है और ये अब लगातार गिरेगा। क्योंकि ये पब्लिक है सब जानती है।
बीजेपी थिंकटैंक, बड़े बड़े नेताओं पर लगता है कुमति सवार है
papajinews
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